Saturday, December 12, 2020

लोगों की मदद के लिए अपना घर तक रख दिया गिरवी…


को;रोना म;हामारी (Corona Epidemic) की रोकथाम के लिए लगाए लाक;डाउन (Corona Lockdown) में बालीवुड स्टार सोनू सूद (Sonu Sood) ने दिल खोलकर लोगों की सेवा की। हजारों लोगों को उनके घर सुरक्षित पहुंचाया। आज भी बच्चों की पढ़ाई के लिए काम कर रहे हैं। सोनू की इस दरियादिली के लाखों लोग मुरीद हैं।









मु;सीबत में फंसे जिन लोगों की सोनू सूद (Sonu Sood) मदद की है उनके लिए वह रीयल लाइफ के हीरो हैं। बहुत कम लोग यह जानते हैं कि मानवता की सेवा करते वे खुद 10 करोड़ रुपये के क;र्जदार हो गए हैं। उन्होंने अपनी संप;त्तियां गिरवी रखकर बैंकों से क;र्ज लिया है।





हालांकि सोनू कर्ज लेने की बात से इ;न्कार नहीं कर रहे हैं, लेकिन इस बात को उजागर करने से भी बच रहे हैं। बालीवुड स्टार की बहन मालविका सूद कहती हैं कि लोगों की सेवा के लिए बैंकों से क;र्ज लेने की बात उजागर कर वे सहानुभूति हासिल नहीं करना चाहते। सोनू किसी को दुख, पी;ड़ा में नहीं देख सकते हैं। उसकी मदद के लिए उन्हें फिर कुछ भी करना पड़े। कर्ज तो कुछ समय में चुका दिया जाएगा, लेकिन लोगों की मदद का मौका बार-बार नहीं मिलेगा। वह कहती हैं कि उनके भाई ने जो किया उससे वह बहुत खुश हैं।









सोनू सूद की मां स;रोज सूद मोगा शहर के सबसे पु;राने डीएम कालेज में अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष थीं, जो छात्र आर्थिक कारणों से पढ़ाई बीच में छोड़ देते थे वह उनके घर पहुंच जाती थीं। उसे वापस कालेज लेकर आती थीं और फीस भी खुद भ;रती थीं। वेतन का बड़ा हिस्सा वह छात्रों की मदद में ही खर्च कर देती थीं। बचपन में मां से मिले सेवा भाव को सोनू ने एक कदम आगे बढ़;कर जिंदा रखा है।





सोनू इस कदर सं;वेदनशील हैं जब उनका एक प्रशंसक अरमान बि;हार से उनसे मिलने मुंबई के लिए साइकिल से रवाना हुआ तो सोनू ने ये सोच;कर साइकिल से मुंबई पहुंचने में तकलीफ होगी, उसके लिए ब;नारस से हवाई जहाज का टिकट बुक करा दिया था। मुंबई के जूहू में पिता श;क्ति सूद के नाम पर सोनू सूद का छह मं;जिल का होटल है। जब उन्होंने यह जगह खरी;दी थी तो वहां लोग कचरा फेंकते थे। आग्रह करने के बाद भी लोग मा;नने को तैयार नहीं थे।





लोगों का कहना था वे 30 साल से यहां क;चरा फेंकते हैं, वे कहां जाएंगे। इसके बाद उन्हों;ने लोगों को कभी वहां कच;रा फें;कने से मना नहीं किया, बल्कि खुद उस कच;रे को उठाने लगे। लोग कचरा फें;ककर जाते और अगले दिन वे उसे उठ;वा देते। जिन क्षेत्रों से कचरा आता था कुछ दिन बाद वहीं बड़ा डस्टबिन रखवा दिया। रोज गाड़ी भेजकर उस डस्टबिन को उठवा;कर डंप में भि;जवा देते। आज उस जगह आ;लीशान हो;टल है।


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